उत्तर प्रदेश

मै बैरी सुग्रीवहिं प्यारा कारण कबन नाथ मोह मारा

कार्यालय संवाददाता की रिपोर्ट 

कोंच जालौन रामलीला के 170वें महोत्सव में रविवार की रात बाली बध लीला का शानदार और रोमांचकारी मंचन किया गया सीता अन्वेषण में निकले राम लक्ष्मण शबरी के आश्रम में पहुंचते हैं जहां राम उसे नवधा भक्ति का ज्ञान देकर सुग्रीव से मित्रता करते हैं और बाली का बध करते हैं।

सीता हरण और गिद्धराज जटायु का अंतिम संस्कार करने के बाद जनकनंदिनी सीता की खोज में राम और लक्ष्मण गहन वन में प्रवेश कर जाते हैं और वन के जीवों से उनके बारे में पूछते हुए महर्षि मतंग के आश्रम में पहुंचते हैं जहां भीलनी शबरी अपने गुरु मतंग के बताए अनुसार प्रभु राम की प्रतीक्षा में रोज मार्ग को बुहार कर पुष्पों से आच्छादित करती रहती है। शबरी राम और लक्ष्मण की आवभगत करती है और प्रेमातिरेक में उन्हें अपने जूठे बेर खिलाती है। राम शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान देकर उसके बताए अनुसार ऋष्यमूक पर्वत पर रह रहे सुग्रीव से मित्रता करते हैं और उसके दुखों का कारण पूछते हैं। सुग्रीव उन्हें बाली के बल पराक्रम और मय दानव से हुए बाली के युद्ध का पूरा वृतांत बताता है। सुग्रीव बताता है कि जब गुफा से रक्त की धारा निकली तो वह घबरा गया कि मय दानव ने बाली को मार दिया है और गुफा से बाहर आकर वह किष्किंधा राज्य को तहस नहस कर सकता है सो भयवश वह गुफा का द्वार एक शिला से बंद कर वापस आ जाता है और किष्किंधा का सिंहासन सूना देख मंत्रिमंडल सिंहासन पर उसे आसीन कर देते हैं। दानव को मारकर बाली लौट आता है और उसे सिंहासन पर बैठा देख क्रोध में भरकर उसे बुरी तरह मारपीट कर किष्किंधा राज्य से निष्कासित कर देता है। राम बाली का बध कर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बना देते हैं। बाली की भूमिका रुचिर रस्तोगी, सुग्रीव ध्रुव सोनी, हनुमान अभिषेक रिछारिया ‘पुन्नी’, तारा महावीर लाक्षकार, शबरी प्रमोद सोनी, कबंध जवाहर अग्रवाल ने निभाई। पार्श्व गायन नरोत्तम स्वर्णकार, सूरज शर्मा ने किया, संकेतक की जिम्मेदारी दिनेश मानव व नीरज द्विवेदी ने संभाली।

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